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दिल बे-करार



अभी तो उनसे मिले भी नहीं हम

और ये दिल बे-करार होने लगा है

न तो उसे देखा और न ही उसे जाना

फिर भी मन में एक धुन गूंज रहा है

अजब बात है – उसकी बात में

सिर्फ बात ही छिड़ी है

और यहाँ रोम रोम मुस्कुरा रहा है

पर चुपके से अन्दर एक सवाल टहल रहा है

जैसे वह सोच रहा है

यह हकीक़त नहीं बल्कि एक धोखा है

जैसे रेगिस्तान में पानी का धोखा है

या फिर यह सिर्फ एक डर की अपनी बनाई कहानी है

जो सवाल मेरे मन में टहल रहा है

पर अब एक और सवाल है जो उठ खड़ा है

वह यह की अगर यह डर है तो क्यों है

मैं उसे जानता तक नहीं

फिर ये डर किस लिए और क्यों

क्या यह डर एक अजनबी से करीब होने का है

या फिर यह डर खुद का ठुकराए जाने का है

पर इस बात से डरना क्यों?

अपनाने की कला हर किसी के पास तो नहीं

इसलिए यह सोच लिया है

तुमसे सामना तो अब करना है

फिर चाहे मुझे अपनाओ या फिर ठुकराओ

पर तुमसे मिलना ही है

वरना यह सवाल जो मेरे मन में

हर वक़्त ठहल रहा है

यह मुझ में ही कही गुम हो जायेगा

फिर सालों बाद भी यह कही नहीं जायेगा

मेरे डर की वजह बने उस सवाल को

अपने मन से बाहर निकलना ही है

उसका सिर्फ एक ही तरीका है

के तुम्हारा मुझे सामना करना है

कोशिश तो दिल से करेंगे तुझे अपनाने की

और न कर सके

तो अलविदा भी ख़ुशी से कहेंगे तुम्हे

लेकिन भरोषा करना खुद पर मुझ से पहले

तो शायद तुम्हे नज़र आये

तेरा हमसफ़र मुझी में

न कह सको खुल कर तो न सही

किसी और से ही कह देना हँसी में

के हाँ हम उसके होना चाहते है

के हाँ हम उसके हमसफ़र बनना चाहते है

दिल तो बे-करार है

अब रूह भी बे-करार है ख़ुशी से

अभी तो उनसे मिले भी नहीं हम

और ये दिल बे-करार होने लगा है

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