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क्या JNU Protest को समर्थन देना देशद्रोह है?



दोस्तों जैसा की आप सभी जान ही रहे होंगे की अभी JNU Students सरकार के द्वारा बढ़ाई गयी फीस को लेकर आन्दोलन कर रहे है. जवाहर लाल नेहरु यूनिवर्सिटी के ये छात्र सरकार का इसलिए विरोध कर रहे है क्योकि सरकार ने अचानक ही कई गुना ज्यादा फीस वृद्धि कर दी.

JNU स्टूडेंट्स का कहना है की कोई भी फीस वृद्धि छात्र संघ से बात किये बिना नहीं की जा सकती. जबकि छात्र संघ को सिर्फ 10 मिनट ही पहले मेल किया गया की इस तरह की कोई मीटिंग है आप तुरंत आ जाइये. जाहिर है की छात्र संघ का 10 मिनट के अन्दर उस मीटिंग में उपस्थित होना न मुमकिन था. इसके बावजूद बिल को पास कर दिया गया और फीस वृद्धि कर दी गई.

JNU स्टूडेंट्स के मुताबिक यह सब कुछ सोची समझी साजिश के तहत किया गया है. वरना सरकार और यूनिवर्सिटी के चांसलर को ऐसी भी क्या जल्दी पड़ी थी की उन्होंने सारा खेल 10 मिनट के अन्दर ही खेल लिया. अगर बात की जाए की JNU छात्रों की माँग क्या सही है या फिर गलत तो मैं चाहूँगा की आप इस पुरे आर्टिकल को पढने के बाद खुद ये फैसला करें.

पहले JNU में पढने वाले छात्रों को सालाना फीस 27600 से लेकर 32000 रुपये पड़ता था. लेकिन अब फीस वृद्धि के बाद हर एक छात्र को सालाना फीस 61000 रुपये से भी ज्यादा देना पड़ेगा. अब इसमें आप छात्रों के अपने निजी जरूरतों को बाहर ही रखिये. इस फीस वृद्धि के साथ ही JNU भारत की सबसे महँगी यूनिवर्सिटी में तब्दील हो जाएगी. जोकि कमजोर परिवार से आने वाले बच्चों पर किसी बिजली गिरने से कम नहीं है.

जवाहर लाल यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट खुद इस बात को बताती है और मानती भी है की JNU में पढने वाले 45% से ज्यादा बच्चे गरीब और दूरदराज के इलाको से आते है. अगर यह फीस वृद्धि होती है तो ये 45% से ज्यादा बच्चे अपनी पढाई पूरी नहीं कर पाएंगे और इन्हें यूनिवर्सिटी छोड़ के जाना होगा. बहुत से कम अक्ल लोग यह कह रहे है की टैक्स का पैसा jnu पर खर्च क्यों हो रहा है.

अगर हम ऐसे कम अक्ल लोगो की बात सही मान भी ले तो फिर मैं उन लोगो से यह पूछना चाहता हूँ की अगर टैक्स का पैसा पढाई पे खर्च करना गलत है. तो क्या हमारे द्वारा दिए टैक्स का पैसा अरबपति और करोडपति लोगो को क़र्ज़ के रूप में देना और फिर उस कर्ज को माफ़ करना कितना सही है. वास्तव में इस तरह की सोच कम पढ़े लिखे जाहिल लोग या फिर राजनितिक पार्टी को सपोर्ट करने वाले लोग कह रहे है.

बात करें न्यूज़ चैनल की तो आप न्यूज़ चैनलों की भाषा ध्यान से सुनिए वो इस तरह की भाषा का प्रयोग कर रहे है. जैसे ये छात्र नहीं बल्कि ISIS के लड़ाके हो. JNU की स्थापना ही पुरे भारत के लिए रोल मॉडल के तौर पर हुई थी. अगर बात की जाए JNU छात्रों की अय्यासी की तो यह भी आप इसी बात से अंदाज़ा लगा सकते है की JNU हर साल देश की सर्वश्रेठ यूनिवर्सिटी होने का ख़िताब अपने नाम करती आई है. अगर इसके स्टूडेंट्स अय्यास है तो फिर इन अय्यास स्टूडेंट्स के भरोसे JNU हर बार सर्वश्रेठ यूनिवर्सिटी होने का खिताब कैसे प्राप्त कर लेता है. मैं तो कहता हूँ ऐसे अय्यास स्टूडेंट्स हर स्कूल कॉलेज में होने चाहिए जो अपने स्कूल और कॉलेज को टॉप पर पहुँचा दे.

सोशल मीडिया पर आपको ऐसे बहुत से फेक फोटो और विडियो और मैसेज देखने सुनने और पढने को मिल जायेंगे. जो JNU को लेकर आप सभी के मन में घृणा की भावना को जन्म देने लगता है. लेकिन क्या वास्तव में JNU वैसा है जैसा की उसे बदनाम करने वाले लोग कह रहे है. JNU की रिपोर्ट बताती है की JNU में सबसे ज्यादा छात्र वे है जिनके परिवार की महीने की कमाई 12000 रुपये से भी कम है.

ये छात्र दूर दराज के गाँव से आते है JNU में सिर्फ दिल्ली के ही नहीं बल्कि देश भर के राज्यों से आये छात्र पढ़ते है. इसी वजह से सरकार सबसे ज्यादा JNU छात्रों के प्रोटेस्ट से डरती है. इस प्रोटेस्ट से सरकार इस लिए भी डर रही है क्योकि इसी तरह का प्रोटेस्ट गुजरात में 20 दिसम्बर 1973 को हुआ था. उस वक़्त भी भारत की इकॉनमी स्लोडाउन थी और उस वक़्त की कांग्रेस की सरकार ने कुछ इसी तरह का रवैया अपनाया था.

सरकार ने 20% की फीस वृद्धि की वो भी उस वक़्त जब देश में इकॉनमी स्लोडाउन चल रहा था. नौकरी नहीं थी और देश की अर्थव्यवस्था लगातार निचे की तरफ लुढ़क रही थी. स्टूडेंट ने इसके विरोध में प्रोटेस्ट किया इस प्रोटेस्ट को पुरे गुजरात में सपोर्ट मिला और इसी वजह से वहाँ कांग्रेस की सरकार भी गिर गयी. कुछ इसी तरह का JNU के साथ हो रहा लेकिन चुकी JNU एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है और इसमें पढने वाले बच्चे पुरे देश भर से आते है और साथ ही विदेशी बच्चे भी यहाँ पढ़ते है.

इसकी वजह से सरकार को यह डर सता रहा है की JNU स्टूडेंट्स के प्रोटेस्ट को अगर गलती से भी देश भर के अलग अलग राज्यों से सपोर्ट मिल गया तो बीजेपी सरकार को गिरने से फिर कोई नहीं बचा सकता है. लेकिन सवाल यहाँ सरकार गिराने या बनाने का नहीं है. सवाल यहाँ ये है की क्या सरकार का इस तरह से मनचाहे तरीके से फीस वृद्धि करना सही है. वो भी ऐसे वक़्त में जब देश की इकॉनमी स्लोडाउन है और नई नौकरियाँ भी नहीं है. हद यहाँ तक है की बेरोजगारी अपने 45 साल के इतिहास में सबसे ज्यादा है.

आज दुनिया भर के लोकतान्त्रिक देश अपने देश में फ्री शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा दे रहे है या फिर देने की और अग्रसर है. क्योकि जब लोग शिक्षित होते है तो देश का विकास होता है. पढ़े लिखे लोग ऐसी सरकार का चुनाव करते है जो लोगो की भलाई के लिए काम करें. पढ़ा लिखा समाज ही एक बेहतरीन शासन व्यवस्था का निर्माण के साथ साथ देश का निर्माण करने की क्षमता रखता है.

स्टूडेंट का ये भी कहना है की यूनिवर्सिटी का पुस्तकालय बहुत जल्दी बंद हो जाता है. जिसकी वजह से वो पढ़ नहीं पाते. इससे पहले की आप यह सोचे की क्या यूनिवर्सिटी का पुस्तकालय या रीडिंग रूम पुरे रात भर खुला छोड़ दे ताकि स्टूडेंट वहाँ अय्यासी कर सके? तो मैं आपको बता दूँ JNU जैसे यूनिवर्सिटी जहाँ उच्च स्तरीय पढ़ाई होती है जहाँ ज्यादातर छात्र पीएचडी करते है. इस तरह की यूनिवर्सिटी में 24 घंटे पुस्तकालय और रीडिंग रूम खुले रहने का तरीका है.

अगर आप दुनिया में मौजूद JNU जैसे उच्च स्तरीय किसी भी यूनिवर्सिटी के बारे में पता करेंगे. तो आपको यह मालूम होगा की पुस्तकालय हॉस्टल रीडिंग रूम ये सभी जगह लगभग 24 घंटे खुले रहते है. जाहिर है रिसर्च करने वाले स्टूडेंट्स के दिमाग में कब कौन सा ख्याल जन्म ले और उसे उसी वक़्त उस पर काम करना पड़े कोई नहीं जानता. इसीलिए दुनिया भर की ज्यादातर उच्च शिक्षा संस्थानों में पुस्तकालय हॉस्टल और रीडिंग रूम लगभग 24 घंटे काम करते है.

लेकिन अफ़सोस भारत में JNU छात्र जब इस तरह की माँग कर रहे है तो हम उन्हें देशद्रोही अय्यासी चरित्रहीन तक कह रहे है. जरा आप ही सोचिये क्या आप नहीं चाहते की कल आपके बच्चों को अच्छी सस्ती उच्च शिक्षा प्राप्त हो. सिर्फ JNU के छात्र ही प्रोटेस्ट नहीं कर रहे बल्कि BHU, Dehli University, IIT, IIM के भी स्टूडेंट प्रोटेस्ट कर रहे है. इसके साथ ही देश के अलग अलग राज्यों में भी अलग अलग कॉलेज और यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट प्रोटेस्ट कर रहे है. ये और बात है की गोदी और बिकाऊ मीडिया आप तक उनकी खबर ही नहीं पहुँचा रहा है.

सिर्फ JNU ही सरकार के टारगेट में क्यूँ ?

अगर आप के मन में यह सवाल उठ रहा है की अक्सर JNU और उसके स्टूडेंट ही टारगेट पे क्यों है. यह जानने के लिए आपको भारत के इतिहास के साथ साथ हाल ही के कुछ सालों को अच्छी तरह से देखना होगा और याद करना होगा. JNU शुरू से ही लोकतान्त्रिक रहा है और इसके स्टूडेंट शुरू से ही मुखर हो कर बिना डरे अपनी बात कहते आये है.

अरुण जेटली इंदिरा गाँधी के समय JNU स्टूडेंट्स थे और जब इंदिरा गाँधी ने देश में इमरजेंसी लागु की थी. तो JNU स्टूडेंट्स ने बढ़ चढ़ कर उस वक़्त की प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी का खुल कर विरोध किया था. उस आन्दोलन में आज के बड़े बड़े नेता भी शामिल थे जो उस वक़्त JNU और दुसरे कॉलेज में पढ़ रहे थे. जैसे की लालू प्रसाद यादव, अरुण जेटली जैसे युवा स्टूडेंट ने स्टूडेंट प्रोटेस्ट से ही देश के सामने युवा नेता के तौर पर उभर के आये. इस प्रोटेस्ट के बाद हम सभी जानते है की क्या हुआ इंदिरा सरकार गिर गयी और अगली लोकसभा चुनाव भी इंदिरा गाँधी हार गयी.

अगर आप 2014 से पहले यानि बीजेपी की सरकार बनाने से पहले के न्यूज़ और विडियो देखे तो आपको उन में भी JNU स्टूडेंट आपको दिखाई दे जायेंगे. अब इसका मतलब यह नहीं है की JNU स्टूडेंट्स हर बात पर प्रोटेस्ट करते रहते है. अगर आप उनके द्वारा किये गए सभी प्रोटेस्ट को पुरे डिटेल्स से पढेंगे जानेंगे समझेंगे तो आपको पता चलेगा की JNU सही मायनो में देश की शान है और उसके स्टूडेंट ही सही मायनों में भारत के भविष्य निर्माता है.

2014 के बाद जिस तरह से सरकार ने सरकारी संस्थाओं पर कब्ज़ा किया है उससे JNU बहुत चिंतित है. क्योकि सरकार का काम है देश चलाना न की सरकारी संस्थाओं पर कब्ज़ा करना और उन्हें अपने मन मुताबिक चलाना. हाल ही में रिपोर्ट कहती है की इलेक्शन कमीशन, ED, सीबीआई, NIA जैसे सरकारी संस्थाओं पर जनता का विश्वास कम हो गया है. ऐसे में JNU स्टूडेंट्स का अपने और अपने देश के भविष्य को लेकर चिंतित होना सही है.

JNU Students क्या चाहते है ?

JNU स्टूडेंट्स की माँग है की सरकार बढ़ाई गयी फीस को वापस ले और फिर छात्र संघ के साथ मीटिंग करने के बाद ही किसी तरह की फीस वृद्धि की जाए जैसा की शुरू से होता आ रहा है. छात्र फीस बढ़ोतरी को लेकर विरोध इसीलिए कर रहे है क्योकि यह फीस वृद्धि उन पर थोपा जा रहा है. अगर देश के किसान का बेटा फ्रेंच लैंग्वेज पढ़ कर पर्यटकों को अपना देश घुमाने का काम करता है तो इससे देश को ही फायदा है.

JNU ने देश को बहुत से वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री, इतिहासकार, डेमोक्रेट, कॉर्पोरेट, दिए है ये सभी आज देश का नाम उचा कर रहे है. हाल ही में JNU के छात्र रहे अभिजीत बनर्जी को अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरुष्कार प्राप्त हुआ है. यह देश के लिए सम्मान की बात है या अपमान की, अगर आपको लगता है की लोकतान्त्रिक तरीके से अपने हक की आवाज़ सरकार के कानो में पहुँचाना देश द्रोही होना है. तो फिर हम यही कहेंगे की फिर हमे देश द्रोही होने में कोई शर्म नहीं.

अगर अच्छी और सस्ती शिक्षा की माँग करना देश द्रोही है होना है तो फिर मैं यही कहूँगा की इस देश के हर स्कूल से लेकर कॉलेज तक और कॉलेज से लेकर यूनिवर्सिटी के छात्रों को अपना बैग उठा कर सरकार से अपने हक की माँग करना चाहिए. फिर चाहे पूरी दुनिया आपको देशद्रोही कहे आपको अपने पथ से हटना नहीं है बिना अपना अधिकार लिए, आप सभी से अनुरोध है की सरकार या पार्टी की भक्ति छोड़ के JNU Students Protest को सपोर्ट कीजिये.

वरना कही ऐसा न हो की भविष्य में जब आपका बच्चा आप से पूछे की JNU जैसे टॉप की यूनिवर्सिटी तबाह हो रही थी तो आप क्या कर रहे थे और आप उसके किसी भी प्रश्न का जवाब इस लिए नहीं दे पाएंगे. क्योकि आज आप सरकार या किसी पार्टी या व्यक्ति की अंध भक्ति में इस तरह से डूबे है की आपको आने वाला देश का अंधकारमय भविष्य नज़र ही नहीं आ रहा. आप सरकार या पार्टी या किसी व्यक्ति का समर्थन करने के लिए पूरी तरह स्वतन्त्र है लेकिन कभी कभी आपको अपनी पसंद और नापसंद से ऊपर उठ कर सही और गलत में भी फर्क करने आना चाहिए.

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