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कहानी – रूह भाग 3



अफज़ल रात के अंधेरे में नूर बानो के घर जा पहुँचा। उसने दरवाजे पे दस्तक दी लेकिन किसी ने नही खोला। उसने फिर जोर से दस्तक दी, अंदर से आवाज़ आयी-

कौन है ? (मुलाज़िम)

जी मैं हूँ अफज़ल। (अफज़ल ने जवाब दिया)

इतनी रात को कैसे आना हुआ ? (मुलाज़िम)

जी मुझे नूर बानो से कुछ बहुत जरूरी काम है। (अफज़ल)

आपको जो भी काम है आप कल आइयेगा। (मुलाज़िम)

यह कह कर मुलाज़िम वापस लौटने लगा। तभी उसे सीढ़ियों के ऊपर नूर बानो मिली।

कौन है दरवाज़े पे ? (नूर)

बीबी जी वो मौलवी साहब के बेटे अफज़ल है। मैंने उनसे कह दिया है कि वो कल सुबह आये। (मुलाज़िम)

तुमने ऐसा क्यूँ किया क्या पता वो वाकई किसी बहुत जरूरी काम से आया हो। जाओ फौरन नीचे, उसे अंदर बुला ले आओ। (नूर)

जी बीबी जी जैसा आप कहे। (मुलाज़िम)

मुलाज़िम दरवाज़े पे गया, उसने दरवाज़ा खोला तो अफज़ल को सामने पाया। तुम्हे बीबी (नूर) जी अंदर बुला रही है। अफज़ल घर में दाख़िल हुआ और मुलाज़िम के पीछे पीछे चलने लगा।

नूर बानो ऊपर खड़ी थी, उसने अफज़ल को देखा और अफज़ल ने नूर को दोनो की आँखे एक हुई। कुछ वक़्त के लिए दोनो एक दूसरे को देखते रहे। तभी मुलाज़िम ने कहा –

बीबी जी! इन्हें ऊपर ले के आऊँ या आप इनसे नीचे ही मिलेंगी। (मुलाज़िम)

आप इन्हें ऊपर बैठक में ले आइये। (नूर)

जी जैसा आप कहे (मुलाज़िम)

मुलाज़िम अफज़ल को ऊपर के बैठक रूम में बैठा कर वहाँ से चला गया। कुछ देर बाद नूर खुद को एक लाल मखमली शाल में लपेटे हुए कमरे में दाख़िल हुई।

कहिये कैसे आना हुआ आपका ? (नूर)

मैं आप से निक़ाह करना चाहता हूँ नूर, क्या आप मुझसे निक़ाह करना चाहेंगी। (अफज़ल ने अपनी बात बड़ी ही बेबाकी से कही।)

अफज़ल की बात सुनते ही नूर हँस पड़ी।

“ये क्या कह रहे है आप लगता है रात को नींद नही आई इस लिए नूर से मज़ाक करने यहाँ तक चले आये।(नूर मैं कभी सपने में भी तुमसे इस तरह का वाहियात मज़ाक नही कर सकता।)

अफज़ल साहब, आप मौलवी फकरुद्दीन के बेटे है। मैं तवायफ़ चाँद बीबी की बेटी, आप ने सोचा भी कैसे की इस कोठे से कभी किसी की डोली इज्जत के साथ उठेगी और किसी इज्जत घराने में जाएगी।

मेरा ख़्याल है कि आप की तबीयत ठीक नही है। शायद इस लिए इस तरह की बेतुकी बाते कह गए। खैर अब आप जाइये, रात बहुत हो चुकी है। इतनी देर रात को अगर किसी ने आपको इस कोठे से निकलता देख लिया, तो आप पर उँगली उठेगी।

और नूर ये कभी नही चाहेगी की एक इज्जतदार और ईमानदार इंसान पर नूर की वजह से उस पर आँच आये।अब आप यहाँ से तशरीफ़ ले जा सकते है।”

नूर उठ कर जाने लगी, तभी अफज़ल बोल पड़ा –

नूर हम कोई मजाक नही कर रहे और न ही इस वक़्त हम नशे में है। हमने जो कहा पूरे होशो हवास में कहा हम आपसे मोहब्बत करते है नूर। हम आपको अपना बनाना चाहते है। आपको इज्जत से इस घर से ले जाना चाहते है।

आपको अपने दिल में अपने घर मे अपनी ज़िंदगी के हर एक पल में बसाना चाहते है। हमारा यकीन कीजिये नूर हम आपसे बेहद मोहब्बत करते है। तब से जब से हमने आपको पहली दफ़ा देखा था। जब हम पहली बार आपके घर आये थे।”

यहाँ मोहब्बत के दावे करने वालो की कमी नही है अफज़ल साहब। यहाँ हर रोज़ कोई नया आशिक़ मोहब्बत के दावे करता है और सुबह तक सारे दावे ताक़ पे धरे के धरे रह जाते है। (नूर ने अपनी हर बात पे ज़ोर दे कर कहा ताकि अफज़ल को उसकी बातों पे अच्छे से यकीन हो जाये और वो दुबारा उस से मोहब्बत के दावे न करे और न ही निक़ाह की बात।)

नूर हम आपके बिना जी नही सकते, अब या तो नूर अफज़ल की होगी या फिर अफज़ल इस दुनिया को अलविदा कहेगा। (अफज़ल ने मेज़ पे रखी फल काटने वाली छुरी अपने हाँथो में ले कर उसे अपने गले पे रख दिया।)

मौलवी के बेटे हो के आप को इतना नही पता कि अल्लाह ने हमे अपनी खुद की जान लेने का हक़ ही नही दिया। मौत की दुआ माँगना तक जहाँ हराम है वहाँ आप खुदकुशी करने की सोच रहे है।

ये ज़िन्दगी अल्लाह की दी हुई है नूर बेशक वो जैसा चाहे वैसा सलूक करे मेरे साथ। लेकिन अगर नूर अफज़ल की ज़िंदगी का हिस्सा नही बनी तो फिर ये गुनाह मैं आज जरूर करूँगा। फिर चाहे मेरी रूह हमेशा हमेशा के लिए जहन्नुम की आग में जलती रहे।

पूरा माहौल गर्म हो गया, नूर समझ गयी कि यह झूठ नही बोल रहा। अगर मैंने इसे ठुकराया तो ये पागल वाकई कुछ कर गुजरेगा। सारा इल्ज़ाम मुझ पर आ जायेगा, लोग हमारा जीना दुस्वार कर देंगे।

तुम कहते हो तुम्हे मुझसे मोहब्बत है। (नूर)

कहता नही बल्कि सच में मुझे तुमसे मोहब्बत है। (अफज़ल)

तो फिर क्या तुम मेरा एक काम करोगे। (नूर)

तुम्हारे लिए अब जान भी हाजिर है। (अफज़ल)

जान नही चाहिए, बस तुम्हे मेरा एक काम करना होगा। (नूर यह कह कर दीवाल की तरफ बढ़ी और टेबल पर रखी कागज़ और कलम उठा ले आयी)

बैठो मेरे पास। (नूर ने अफज़ल को ज़मीन पे बिछी कालीन पर बैठने को कहा।)

लो कलम और तुम मुझसे जितनी मोहब्बत करते हो। तुम्हारे दिल और दिमाग में मुझे लेकर जो भी ख़्याल अरमान ख़्वाब है वो सब इस कागज़ पर लिख दो। (नूर ने अफज़ल को कलम देते हुए कहा)

स्याही कहा है (अफज़ल ने नूर से पूछा)

तुम्हे यह ख़त अपने खून से लिखना है। (यह सुन कर अफज़ल थोड़ा हैरान हुआ। फिर उसने नूर को देखा और मुस्कुराते हुए उसी छुरी से अपनी हथेली पे काट लगा दी। यह सब वो नूर को देखते हुए कर रहा था।)

उसने कलम लिया और उसे हाँथो से निकल रहे खून में डुबोया। फिर उसी से सफेद कोरे कागज़ पर नूर के नाम अपना ख़त लिखने लगा। इस दौरान नूर अफज़ल को देखती रही, वो हैरान थी उसकी उम्र से 4 साल कम का लड़का भला कैसे उसके इश्क़ में गिरफ़्तार हुआ।

इधर अफज़ल लिखता रहा, तभी एकाएक अफज़ल नूर की गोद में गश्त (चक्कर) खा कर गिर पड़ा। उसके होंठो पर बस एक ही नाम था – नूर …. नूर…. नूर…..

आगे कहानी जारी है ………

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